बेटियाँ (Daughters )

 

Spread Positivity इस कविता को लिखने का ख्याल मुझे Word Press पर एक post की cover image देखने के बाद आया था । बेटियाँ स्वभाव से भावुक और जिम्मेदार होती है ।

अपने माँ-बाप से दिल से जुड़ी हुयी होती हैंl समय के साथ-साथ माँ के साथ उनका रिश्ता और प्रगाढ़ होता जाता है और कुछ समय के बाद दोस्ती के रिश्ते मे बदल जाता  है । 

  • कुछ दिनो के बाद बेटियाँ माँ को राह दिखाने का भी काम करती हैं। हर परिवार मे बेटियाँ अपनी माँ को सफल रूप मे देखना चाहती है । समाज मे इस तरह की बातों को देखने के बाद मैने माँ बेटी के संवाद को कविता रूप मे लिखने की कोशिश की है …

“सर्दियों की गुनगुनी धूप सी ही तो होती हैं बेटियाँ ”

परियों के साथ होने का एहसास होता है
जब हाथ मे बेटियों का हाथ होता है

Spread Positivity

भूल जाती हैं जब माँ अपनी अहमियत

तब उनकी बातों मे सवाल होता है

हमारी माँ के अलावा भी तो है आपका अपना व्यक्तित्व
क्यूँ नही समझती आप अपना अस्तित्व

हमारे नन्हे पाॅव ने अब चलना सीख लिया
हमारी आवाज ने अब तुतलाना छोड़ दिया

Spread Positivity

सँभालिये अब आप अपने आप को
जुट जाइये एक बार फिर से उत्साह से

काम कुछ ऐसा कर दिखाइये
हमे गर्वान्वित करते ही जाइये

तब याद आयी माँ को ये बात भी
हुआ दिल को इस बात का एहसास भी

जब माँ अपनी अहमियत भूल जाती हैं
तब प्यार से बेटियों से डाट भी खाती हैं

उन कड़वी बातों को भी सुनकर गुरूर होता है
क्योंकि उस डाट मे भी गजब का फितूर होता है

अच्छा नही लगता उन्हे कि माँ
सिर्फ उनकी माँ ही बनकर रह जायें

              कम से कम अब तो अपने

आप को सँवारती जायें

माँ की ही कही बातों का
माँ के ऊपर पलटवार होता है

भूल जाइये अब इधर-उधर की बातों को
कर लीजिये अपने समय का सदुपयोग

नही तो करेंगी बाद मे अफसोस
क्यूँ समय पर खो दिया आपने अपना होश

माँ को फिर यह समझाया जाता है

बिना मेहनत के कुछ पाया नहीं जाता है

कर लीजिये अपने दिमाग के साथ साथ

हाथ पांव को भी मज़बूत

क्यों कि खोजना है आपको अपना वजूद

फिर वह पकडती हैं दौड़ कर माँ का हाथ

भागिए अब पकड़ कर हमारा हाथ

कभी अपने आपको हमसे अलग मत सोचियेगा

आपकी ममता से ही बडे हुए हैं  हमेशा

यही सोचियेगा

माँ और बेटी का रिश्ता अनमोल होता है

बिना कुछ कहे ही सब कुछ बोलता है

आवाज़ के उतार चढाव से माँ मन की बात जानती है

माँ की इस प्रतिभा को हमेशा बेटी मानती है

सुनकर बेटियों की बातों को
माँ के शरीर मे हो जाता है ऊर्जा का संचार

आने लगते हैं दिमाग मे
सुलझे हुये से विचार

चलों आज से बेटियों की बात को मानते हैं
अपने व्यक्तित्व को एक बार फिर से पहचानते हैं

अपनी भी एक अलग पहचान बनाते हैं
नये मुकाम तक पहुँचने की चाहत मे जुट जाते हैं

Spread Positivity

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8 thoughts on “  बेटियाँ (Daughters )

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