“आ ,अब लौट चले “(Let,s go back home)

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सामान्यतौर पर हम भारतीय अमेरिकियों से बहुत ज्यादा प्रभावित रहते हैं चाहे खानपान की आदतें हो परिधान हो या वहाँ की राजनीतिक उथल पुथल ।आजकल तो सारे विश्व के लोगो की निगाहें अमेरिकी राष्ट्रपति के ऊपर टिकी है । हम भारतीय भी अपने राष्ट्रपति की तरफ न देखकर अमेरिकी राष्ट्रपति को बड़े गौर से देख रहे हैं ।

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कुछ दिनपहले की ही तो बात है मेरा भी दिमाग अमेरिका पहुँच गया” मेरी नजर अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ फिर गयी ,उनके सुन्दर और सुनहरे बालों पर जाकर ठिठक गयी “। सत्तर साल की उमर में भी अच्छे खासे बाल हैं उनके सिर पर । दिमाग को भी ज्यादा देर तक विदेश मे रुकना सही नही लगा , शाम होते होते वापस आ गया और मुझे बचपन से लेकर आज तक का अपने पापा का साथ  याद आ गया।

आजकल जब भी उनके साथ होती हूँ उनके  सिर के  गिने चुने बालों को रंगने का भी काम मेरा ही होता है ।सावधानी पूर्वक काम करना पड़ता है इधर उधर रंग को फैलाने की कोई गुन्जाइश नही रहती है ।

एक दिन मैने अपने पापा को बोला आप इन चंद बालों को क्यों रंगते हैं मैदान साफ क्यूँ नही करा लेते ,मेरे इतना बोलते ही “उनका चेहरा उतर गया 440 वोल्ट के तेज वाला चेहरा 0 वोल्ट के बल्ब जैसे लटक गया”लंबी लंबी-लंबी साँसे भरे और आत्मविश्वास के साथ कहने लगे बेटा !कभी मेरे सिर पर भी “सतपुड़ा के घने जंगल ऊँघते अनमने जंगल”वाली स्थिति रहा करती थी फिर कहने लगे …

       
                         होते थे कभी हमारे सिर पर भी
                                अच्छे खासे बाल

                          रहा है उनका भी कोई
                                35से 40 साल पुराना इतिहास

                          मत देखो इन बची हुयी कहानियों को
                                          तिरस्कार की नजरों से

                          खड़े होते हैं बलवान ही
                                         युद्ध के मैदानो मे

                           आगे से कभी भी मुझे
                                          ये मत समझाना

                           मेरे इन बचे हुये सैनिकों को
                                         शहीद मत करवाना

                            यही तो हैं  मेरा आत्मविश्वास
                                       कभी मत करना तुम इन पर हास-परिहास

मैने कहा कोई बात नही ,आप जिसमे खुश हम भी उसमे खुश, लेकिन मेरे माथे पर बल पड़ गये।मै सोचने लगी जब से होश सँभाला तब से नेशनल हाईवे के दोनो तरफ हरियाली देखी है । मै ये तो नही कहती कि रन वे वाली स्थिति है ,लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया एक्सप्रेस-वे वाली स्थिति आ गयी है , बड़ी दूर तक आने के बाद हरियाली दिखती है ।

“मै मन ही मन मे बुदबुदा रही थी ,अपने पापा के सिर के बालो को सजा रही थी” ।थोड़ी देर के बाद ही फिर से विचारों के साथ खेलने लगी , हमारी भारतीय महिलाओं को ही देख लीजिये उनका वजन उनके लिये बड़ा महत्व रखता है । हमारे समाज में शादी से पहले लड़की मोटी नही होनी चाहिये और लड़को के सिर पर पर्याप्त संख्या मे बाल होने चाहिये । लड़कियाँ बेचारी वजन कम करने मे जुट जाती हैं और लड़के नौकरी के साथ-साथ अपने बालो को बचाने मे जुट जाते हैं ।

 हर महिला कोअपने पुराने कपड़ों मे फिट होना बड़ा अच्छा लगता है ।मुझे सोशल साइट्स पर जोक्स और वीडियो बनाने वाले ऐसे लोगों के ऊपर बड़ा गुस्सा आता है , जो महिलाओं की मोटी सी तस्वीर बना कर उन्हें झूठा आइना दिखाते हैं और अपनी चटोरी नजर और काली जुबान उनकी खाने पीने की आदत पर लगाते हैं ।

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अगर आप संयुक्त परिवार वाली संस्कृति से परिचित हैं या आपके दोस्तों का दायरा अच्छा है तो कई दिनो के बाद मिलने पर सबसे जरूरी बात ये होती है कि किसका वजन कितना बढा है और  बालों की स्थिति क्या है । मुझे कभी-कभी अपने एक पारिवारिक मित्र की बात याद आ जाती है , जो हमेशा अपनी पत्नी की तुलना दूसरो से करते थे ,उनको अपनी पत्नी का दही को चीनी के साथ खाना तो बिल्कुल भी पसंद नहीं था बोला करते थे ….

                     क्यूँ हमारे ऊपर जुल्म ढाती हो
                                  हमेशा तुम दही को चीनी के साथ
                                              ही क्यूँ खाती हो

                        मुझे पता है कि जानबूझ कर सताती हो
                                   केवल इसी कारण से ही अपना मोटापा बढाती हो
    
                      कर लिया करो कभी तो अपने
                                     दिमाग का भी सदुपयोग
                                           हमेशा  किया करो दही के साथ
                                                 केवल नमक का ही उपयोग

                      मेरे इसी सुझाव से पतले होने की तरफ
                                        अपने विजयी कदम बढाओगी
                     

          नही तो पूरी जिंदगी अपने मोटापे के 

                                कारण मुझे रुलाओगी

उन्हें इतना भी समझ मे नही आता था कि , कम से कम जिंदगी मे  कुछ तो बढ़ रहा है उनके जैसे नही कि सिर से बाल ही कम होते जा रहे हैं ।

मैने महिलाओं की तुलना मे पुरूषों को ज्यादा देखा है सड़क के किनारे खड़ी गाड़ियों के  साइड मिरर मे अपने बालों को सँवारते हुये या गाड़ी से बाहर निकलने से पहले रिअर व्यू मिरर मे देखकर अपने आप को सँवारते हुये ।

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आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि आपके फोन पर जो इमोजी होती हैं , अधिकतर बिना बालों वाले चेहरे वाली होती हैं । मुझे तो कभी-कभी लगता है , किसी ऐसे ही व्यक्ति की सोच का परिणाम रही होगी जिसके सिर पर बालों की संख्या या तो बहुत कम रही होगी या हो सकता है बिल्कुल न रहे हो ,उनका सोचना शायद यही रहा होगा मेरे साथ ही अपने सारे भावों को बाटना पड़ेगा।

मेरे ख्याल से व्यक्ति का आत्मविश्वास सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है । उसको किसी बाहरी आवरण के सहारे अपने को प्रस्तुत करने की जरूरत नही होती , नही तो सारे के सारे सफल व्यक्ति सिर पर पूरी तरह से घने बालों के साथ और सुन्दर काया वाले ही होते ।

दिमाग ने मुझे बड़े प्यार से समझा दिया दूसरे देश के राष्ट्रपति को इतने ध्यान से देखने की कोई जरूरत नहीं है, बड़ी जोर से बोला “आ अब लौट चले” अपने देश की तरफ वापस ,क्योंकि हमारे देश का ज्वलंत नारा है “स्वदेशी को ही दिमाग मे लाना है “और अपने देश को आगे बढाना है।

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अपने देश की राजनीति मे बैठे हुये युवा से लेकर उम्र दराज लोगों की तरफ गौर फरमाइये और खुश रहिये ।

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