Soorajkund festival is all about spreading positivity 

Spread Positivity
“The Soorajkund festival is a great place to spread positivity by colour and fun”

कल मै भी गयी थी सूरजकुण्ड ह्तशिल्प मेले मे , इसी मेले के बहाने से मैने सूरजकुण्ड को भी देखा । राजा अनंगपाल सिंह तोमर के नगर अनंगपुर मे स्थित इस कुण्ड मे अब पानी का अभाव है लेकिन फिर भी क्या मायावी दिखता है सूरजकुण्ड ।

सुना था कि राजा अनंगपाल खुद यहाँ सूर्य भगवान की आराधना करने आया करते थे हजारों साल पुराना इतिहास है इस कुण्ड का।

मेला परिसर मे घुसते ही भारी भीड़ का सामना करना पड़ा । एकबार मन किया वापस लौट चलूं फिर मन ने कहा चलो देख ही लेते हैं मेला । बचपन मे अपने परिवार के सदस्यों के साथ प्रयाग मे माघ मेले का आनंद लिया करती थी ।

बचपन की बातें आपके मन मस्तिष्क मे एक अमिट छाप छोड़ देती है मै भी इस मेले को उसी मेले से जोड़ रही थी । मेला परिसर मे घुसते ही हांथ के बाँयी तरफ बड़े बड़े झूले लगे हुये दिखायी दिये ।

Spread Positivity रंगबिरंगी झालर , कागज को काटकर बनायी गयी आकृतियां जिन्हें पेड़ या खंबों के सहारे लटकाया गया था ,इन सभी चीजों ने मन को उत्साहित करना शुरू कर दिया ।तभी दिख गये राणा प्रताप के  वंशज बंजारे गड़िया लोहार जाति के लोग । उनकी रंगबिरंगी बैलगाड़ी लोगों को आकर्षित कर रही थी जिसके सामने खटिया पर बैठे बच्चे सामने रखा हुआ हुक्का कुछ अलग ही कहानी बताते हैं । इस जाति के लोगों का चित्तौड़ के प्रति समर्पण उनका अगाध प्रेम और प्रतिज्ञा उन्हे औरो से अलग बताती है ।

Spread Positivity जगह जगह बज रहे नगाड़ों का शोर मन को खुश कर रहा था चौपाल पर होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियाँ लोगों को उत्साहित कर रही थी । कई बच्चे अपने माँ-बाप से बिछड़ रहे थे । छोटे बच्चे कितने मासूम होते हैं न उन्हें पता भी नही होता जिन अनजानो की ऊंगली पकड़ कर वो आगे बढ़ रहे हैं पता नही वो कैसे हैं तभी एक नन्हे बच्चे ने मेरे हांथो को भी कस कर पकड़ लिया । ये सब सोचते-सोचते शायद कविता बन गयी ….

कितना प्यारा होता है मेला

                         बड़ा मजेदार होता है मेले का रेला

                रहता नही है वहाँ कोई अकेला
                          होता नहीं है वहाँ ज्यादा झमेला

                दिखती है रंगबिरंगी दुकान
                       मिलते हैं तरह तरह के सामान

                वो देखो दिख गयी पकवान की दुकान
                       अरे ! तू क्या ढूँढ रहा है इंसान

                 कितनी मस्ती मे है बच्चों का रेला
                         चाहिये होता है उन्हें भी घूमना अकेला

                 वो देखो सज गयी है चौपाल
                        चलती है वही से तो बदलाव की बयार

                 करने को मनोरंजन तरह तरह की चीजें दिखी
                         देखते ही देखते कुछ और भी दुकानें सजी

Spread Positivity                   वो देखो कच्ची मिट्टी से एक घड़ा बना
                           बड़ी अच्छी सी बात हमे सिखा गया

                  रहती है जब गीली मिट्टी तभी उसे ढालो
                            अच्छे इंसान को  भी ऐसे ही बना लो

                 होता है बचपन भी गीली मिट्टी के ही जैसा
                            बच्चों को जैसा ढालोगे बनेगा वो भी वैसा

                 बालपन का हट मुझे तो बड़ा भाता है
                          कुछ भी  कहो इसी बहाने कान्हा जी की याद दिलाता है

                  बचपन मे तो हम सभी मेले मे जाते थे
                         आज मेले मे जाकर वापस बचपन को लाते हैं

                  कितने प्यारे-प्यारे रंग चारो तरफ बिखरे
                                इन्हे देखकर हमारे चेहरे तो खिले

                  रंगो का बड़ा प्यारा सा समागम यहाँ
                              दिखता है मौसम का मतवालापन भी यहाँ

                   वो देखो दिख गया स्वांग रचाया हुआ इंसान
                            हम सब के भीतर भी तो है स्वांग सजाया हुआ इंसान

                  वो देखो वो रहे तरह तरह के झूले
                                आओ चलो जरा हम भी तो झूले
सब कुछ देखने के बाद सूर्य भगवान की तरफ देखा ऐसा लगा मेरा पीछा कर रहे हैं । सूरजकुण्ड के पास गयी तो वहाँ वो बादलों के बीच में चले गये मुझे ऐसा लगा ये अपना मुँह साफ करने गये थे सारा दिन घूमते-घूमते गंदा हो गया था ,थोड़ी देर बाद बाहर निकले शायद कुण्ड के जल मे अपना प्रतिबिम्ब देखना चाहते थे लेकिन वहाँ तो पानी ही नही था अपना रास्ता बदल कर यमुना की तरफ चल दिये और मै अपने घर की तरफ चल दी ।

सारे रास्ते मन उत्साह से भरा रहा सही में इस तरह की जगह चाहे वो मेले के रंग हो या सूरजकुण्ड मन को Positivity से भर देते हैं बाहर निकल कर थोड़ा घूमने की जरूरत होती है ।

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10 thoughts on “Soorajkund festival is all about spreading positivity 

  1. मुझे भी सूरज कुंड जाने का मन है. आपके ब्लॉग ने काफी झलक दिखला दी. बहुत अच्छा लग.

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    1. धन्यवाद 😊ऐसी जगहों पर तो जाना हमेशा बनता है ,जहाँ हमारी संस्कृति का प्रतिबिम्ब दिखता है ।

      Liked by 1 person

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