Spread Positivity : Eagle as a Teacher

Nature का एक महत्वपूर्ण भाग आकाश भी होता है ,जिसको देखने से Positivity आती है  और निश्चित तौर पर ‘Positive effect of nature ‘ भी आता है।जिसके कारण मन खुश होने के साथ-साथ शांत भी हो जाता है।

आकाश की सुन्दरता उसके आसमानी रंग से ही नही होती । किसी भी चीज को सुन्दर दिखने के लिये कई मिली जुली चीजों का योगदान होता है । जब आप उस विषय -वस्तु के ऊपर चिंतन करते हैं , तब हमे ये वास्तविकता समझ मे आती है ।

दिन के आकाश की सुन्दरता मे अलग चीजों का योगदान रहता है और रात के आकाश की सुन्दरता पूरी तरह से आकाश गंगा के कारण होती है । फिर देखते रहिये आप आकाश की तरफ आकाश गंगा खींचने की कोशिश करती है, आप को अपनी तरफ।कभी शांत मन और दिमाग से देखिये आकाश को सारी चकाचौंध से परे दिखता है ।

दिन के आकाश को देखने से थोड़ी जीवंतता का बोध होता है ।आसमानी सा रंग उसके ऊपर रुई से सफेद बादल, सूर्य भगवान की तरेरती हुयी आँखे सब देखकर मन खुश सा हो जाता है।
तभी दिखाई देते हैं जोश से भरे हुये आकाश के पास उड़कर जाने की कोशिश करते हुये पक्षी।

हर पक्षी के उड़ने का अंदाज अलग , फितरत अलग ,दूरी तय करने की क्षमता अलग-अलग इनमे से कुछ तो बहुत तेजी तेजी से पंखो को फड़फड़ा कर छोटी दूरी तय कर पाता है कोई आराम से धीरे-धीरे पंखो को हिलाते हुये लंबी दूरियाँ तय कर जाता है ।इनमे से कुछ तो उड़ते- उड़ते बादलों के पार ही पहुँच जाते हैं।फिर हमारी आँखो को ऊँचाइयो पर कुछ हिलता हुआ सा प्रतीत होता है ।

यही सब अपने घर के बाहर खड़ी हो कर आराम से देख रही थी तभी कोई बड़ा सा पक्षी मेरे बहुत पास से गोते मारकर ऊपर उड़ गया । ऐसा लग रहा था अपने फैले हुये पंखो को मेरे हांथो के पास लाकर कह रहा हो पकड़िये मेरे पंखो को चलिये आपको आकाश की सैर करा कर लाता हूँ ।

कुछ दिनो से देख रही हूँ जब दिन के समय बाहर खड़ी होती हूँ प्राकृतिक सुंदरता देखने मेरे बिल्कुल पास से गोता मारकर ऊपर उड़ जाता है और आकाश की ऊँचाईयों को छूने लगता है।अपनी गर्दन को टेढ़ा करके रखता है, तिरछा देखता है, शायद बातें करना चाहता है मुझसे । आपको पता है कौन सा पक्षी है वो? बड़ा प्यारा सा एक बाज है ।

कई बार मैने उसे बड़े ध्यान से देखने की कोशिश की । फिर मै यह सोचने पर मजबूर हो गयी क्या कहना चाहता होगा ये मुझसे ?कहीं कबूतरों का पीछा करते-करते ऐसे ही तो मेरे सामने से  नही निकल जाता है रोज ये ?

एक दिन बड़े ध्यान से देखने की कोशिश की मैने उसे ऐसा लगा मुझसे बोल रहा हो देखा है आपने कभी मुझे इधर-उधर की फालतू बातों मे समय बर्बाद करते हुये जैसे आप करती रहती हैंl जरूरी काम खत्म करने के बाद जल्दी ही उड़ जाता हूँ आकाश की ऊँचाईयों को छूने के लिये नीचे गोते इसलिये मारता हूँ की आप जैसे लोगो को उड़ने का सलीका सिखा सकूं ।

बताना चाहता हूं की सीधे ऊँचाईयों पर पहुँचना सही बात नही होती संतुलन नही बन पाता ।
पहले उड़ना सीखो नीचे रहो धीरे-धीरे ऊँचाईयों को अपना लक्ष्य बनाओ।कितनी सारी बहुमंजिली इमारतों जैसी बाधायें सामने आती है । बिना टकराये अपने रास्ते खोज लेता हूँ।
लेकिन अपने पंजो को इतना मजबूत रखता हूँ की जबरदस्ती उलझने वाले लोगो से निपट सकूँ।

मैने मन ही मन मे सोचा कितने positive thought है इसके ।फिर मन और दिमाग दोनो ने कहा अच्छा इसी कारण से रोज मेरे सामने से उड़ान भरी जाती थी ।मुझे सिखाना चाहते थे उड़ने का सलीका मैने बोला धन्यवाद मेरे दोस्त ।बाज को हृदय से धन्यवाद बोलकर मैने अपनी आँखो को बंद किया तो अंर्तमन से कुछ पंक्तिया बाज के लिये निकल गयी और मेरी कलम मजबूर हो गयी कविता लिखने के लिये ……
      
    
                                             ओ ! नभ के राजा …

                               कैसे किया भ्रमण इस ओर.

..

                     ऊँचाईयों से चलता नहीं क्या
                                 तुम्हारा अब परिंदो पर जोर

                     भरते हो बड़ी नीची-नीची उड़ाने
                                खोज रहे हो क्या तुम नीचे ही अपने ठिकाने

                     आते ही तुम्हारे मच जाती है हलचल
                                  सारे के सारे पंक्षी हो जाते हैं चंचल

                     कहने को तो तुम बाज हो
                                     लेकिन रखते कहाँ तुम, अपने साज हो.

                      मजबूती तुम्हारे पंखो की ,समझ मे आती है …
                                          लेकिन तुम्हारी ये बेचैनी ,रास नही आती है…

                      लगाते रहते हो आकाश से नीचे गोता…
                                          समझ मे नही आता मुझे की, बाज कैसे  सोता..

                       नजर तुम्हारी बड़ी पैनी है…
                                          सारे कबूतरों की नींद, तुम्ही ने छीनी है ..

                           पंजे तुम्हारे ,बड़े मजबूत हैं….
                                  दिखते तुम ,देवदूत हो…
 
                    रखते हो बड़ी दूर से ,अपने शिकार पर नजर…
                                            होते हैं जब सारे परिंदे बेखबर…

                    हमे पसंद है तुम्हारे , उड़ने का अंदाज….
                                     सिखा दो न हमे  भी ,  अपना  ये अंदाज….

मै बाहर बैठ कर अंतिम पंक्ति लिख रही थी तभी एक बार फिर से मेरे बहुत पास से गोता मारते हुये आया और मालूम है क्या बोलकर फिर से आकाश की ऊँचाईयों को छूने के लिये उड़ गया…
            Always be positive friends 

    
               ( समस्त चित्र internet के सौजन्य से )

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