PODCAST-Dance of The Moon Light

इस कविता को मेरी आवाज मे सुनने के लिए आपलोग इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

शरद पूर्णिमा का चाँद देखा है आपने स्याह काले आकाश मे चमकता रहता है ….आज मैने भी देखा कितना दमक रहा था. ..ऐसा कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है ..इस रात्रि मे चंद्रमा का ओज सबसे तेजवान और ऊर्जावान होता है ..

ये भी कहा जाता है कि आज के दिन श्रीकृष्ण भगवान ने गोपियों के साथ महारास रचाया था ..आज के दिन चाँद पृथ्वी के सबसे पास रहता है … प्रसाद के रूप मे गाय के दूध की खीर बनायी जाती है और उसे चंद्र किरण के सामने रखते हैं । ऐसी मान्यता है कि ये खीर अमृत मे परिवर्तित हो जाती है ….

ये भी कहा जाता है कि आज के दिन लक्ष्मी जी भ्रमण पर निकलती है और जागते हुये लोंगो के घर मे ठहरती हैं..शरद पूर्णिमा आपके मन को अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाता है ..चंद्रमा को तो वैसे भी मन का कारक कहा जाता है …शरद पूर्णिमा के चाँद की रश्मियों से अमृत बरसता है ….

मैने भी रात मे पूर्णिमा के चाँद को देखा धीरे-धीरे सरकता चला जा रहा था बहुमंजिली इमारतों के पीछे उसके साथ-साथ सरकती चली जा रही थी उसकी चंचल किरणें …इतनी चंचल किरणें कि कभी यहाँ कभी वहाँ …आकाश गंगा की तरफ देखा फिर चंद्रमा की तरफ देखा तो मेरा मन चंद्रमा की किरणों को एक नायिका की तरह मानने लगा …फिर उन किरणों के लिये कुछ लिखने का मन करने लगा …


ऐ नवल सुन्दरी ,धवल सुन्दरी ओ चपल सुन्दरी
ऐ नवल सुन्दरी, धवल सुन्दरी ओ चपल सुन्दरी तू कहाँ चली….

कहाँ चली…

ऐ कमल नयन ,चंचल नयन ओ चपल सुन्दरी
कहाँ चली…

रुक जा न ओ धवल सुन्दरी , चंचल मन से तू
कहाँ चली …

ये तो तेरा है अद्भुत खेल ,ओ अद्भुत सुन्दरी तू
कहाँ चली ….

तू तो चंद्रमा की शीतल किरण, ऐ धवल सुन्दरी तू
कहाँ चली ….

रुक जा न ऐ मन की चली, ऐ मन की सुन्दरी तू
कहाँ चली …

आ जा न कर ले कुछ पल तू चैन ,ऐ चंचल सुन्दरी
कहाँ चली …..

बहती है मंद मंद पवन लेकिन , तू तो बता तू
कहाँ चली ….

तू बहती है कल कल करके , ओ सरिता सुन्दरी तू
कहाँ चली ….

बन करके गोमुख समान , ओ गंग धारा सुन्दरी तू
कहाँ चली …..

ऐ चपल सुन्दरी दिखा न मुझको ,क्या छिपा रखा है
ब्रम्हाण्ड में , ऐ ब्रम्हाण्ड सुन्दरी तू कहाँ चली ….

तू तो विचरती अनंत अज्ञात ,ऐ अज्ञात सुन्दरी तू
कहाँ चली ….

ऐ चंद्रमा की पूर्णिमा सुन्दरी , अब तो बता तू
कहाँ चली …

ले ले हमे भी तू साथ में , ऐ चंद्र किरण सुन्दरी तू
कहाँ चली …

करती है भ्रमण आकाश पाताल में ,ओ आकाश गंगा सुन्दरी तू
कहाँ चली ….

तुझको पकड़ना है मुश्किल ,ऐ अदृश्य सुन्दरी तू
कहाँ चली …..

…………..

शरद पूर्णिमा का चाँद निश्चित तौर पर आत्मविश्वास बढ़ा कर positvity लाता है ……..

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