Rivers of Positivity- Our mind as a river

आप ने देखा है क्या रपटों  के ऊपर  तेजी से बहता हुआ पानी …..विनाश लेकर आता है  Negativity से भरा हुआअगर सजग न रहे तो ….

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आपको रपट नहीं मालूम किसे कहते हैं? अरे भाई यह शब्द हमारे ग्रामीण अंचल में पहाड़ी नाले के लिए प्रयोग किया जाता है…

हां तो……

क्षणिक बरसात खत्म पानी का उतरना भी प्रारंभहो जाता है….सब कुछ संभव सा लगने लगता है …..जीवन यात्रा सरल व सुगम हो जाती है ….मन positivity से भरकर प्रफुल्लित हो जाता है …..खुशी के मन मंदिर मे प्रवेश करते ही मन चंचल हो जाता है और इधर उधर घूमने लगता है …..और अपने जैसा कुछ कुछ ढूँढने लगता है..

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ऐ मन मिला क्या तुम्हें कुछ अपना सा …

मन ने दिमाग से कहा मत ढूंढने देना  अकेले मुझे कुछ अपना सा , धोखा खाने की संभावना प्रबल हो जाती है …..

थोड़ा सा तो सँभालो अपने को ये फेसबुक की दुनिया है बच्चा या तो दिल और दिमाग दोनो को साथ लेकर चलो या दोनो को छोड़कर आओ गहरे कुएँ के अंदर , सुला आओ गहरी नींद मे फिर मजा लो इस कल्पनाई दुनिया का …..

कहाँ से खोज कर लायी जाती है विकृत मानसिकता , विकृत मानसिकता वाले इन्सान ।

जिन्दगी भर की भड़ास निकालनी होती है , अपनी हसरतें दूसरों के ऊपर थोपनी होती हैं …
काफी मायावी दुनिया होती है , आप जिसे समझो महिला पुरूष के वेश मे होती है बृहन्नला ।

माँ बाप के लिए  क्या दुखदायी  घड़ी होती है , उनके  लिये बेटे के माँ बाप होने की ….. खुशकिस्मती पर एक परछाई सी पड़ी होती है ।

कर लो धूप छाँव सी दोस्ती , खो दो अपने लोगो को अपने परिवार को ….
खोये रहो मायावी दुनिया मे  , अपने नकली रिश्तो को सँभालने की होड़ मे ।

हमेशा स्टेटस अपडेट करना होता है , लोगो के सामने अप टू डेट रहना होता है ….
कितना नकलीपन कितना दिखावा है , हम से तो ये न निभ पाया है ।

कितना अच्छा लगता है , जब कोई मित्र सामने से मिलता है ….
उन ठहाको मे जो मजा है , उसके सामने ये फेसबुक न टिकता है ।

बाँट लो अपने सुख और दुख आमने-सामने ….
कम से कम आँखों मे आँखे डालकर एक दूसरे को तो पहचाने।

रे मन कहाँ फँसाया तूने मुझे , तू तो वैसे ही निठल्ला था ….
तुझे तो बिना पंख के भी उड़ने की आदत बुरी है …
भूल जाता है रे मन तू बिना पंख के भी आज तक किसी ने उड़ान भरी है ।

आओ न कर ले बच्चों जैसे इस मन को , ढूंढ ले कुछ नटखट पलो को ……
कहाँ उड़ कर मन की ये पतंग चली , अरे रुक जा न ऐ मनचली ।

आओ न मन थोड़ा सा हम भी घूम आते है , थोड़ी सी तफरी कर आते है ….
हो सकता है मिल जाये रास्ते मे कोई अपना सा ।

थोड़ा सा सँभल कर चलना रे मन …
ये आवारा बादलों की दुनिया है दोस्तो …
निरउद्देश्य फिरना जिनका पेशा है दोस्तो …

ऐ मन ,रुक न मन ,बता न मुझे , मिला क्या तुम्हें कुछ अपना सा ।

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One thought on “Rivers of Positivity- Our mind as a river

  1. The strength of any blog is determined by the strength of its content and manner of presentation. You are writing your thoughts in all the forms of writing. Keep it up.

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