सावन और सकारात्मकता

सावन महीना हम भारतीयों के लिये काफी “उर्वरक”होता है1 चाहे मानसिक उर्वरता हो या प्रकृति की उर्वरता, हर जगह” नव सृजन “भगवान शंकर शिव रूप मे “सृजनात्मकता” को प्रोत्साहित करते है1 उनके “विध्वंस रूप”या तांडव को न ध्यान मे रखते हुए, हमेशा “सकारात्मकता”  के बारे मे सोचना ही उत्तम है1

 किसी भी विषय के बारे मे “नकारत्मकता” उर्वरा को समाप्त करती है1 अगर नकारत्मकता का ख्याल आपके दिल और दिमाग मे हावी हो रहा है जिसके कारण आपका व्यक्तित्व प्रभावित हो रहा है, तो रुकिये, ठहरिये और सोचिये, क्या ये उचित है ? कभी कभी जिन्दगी मे ऐसी समस्याएँ आती है जो आपके अपने अस्तित्व को हिला देती है, आपको विवेक शून्य कर देती है 1

समझ मे नही आता ये क्या हो रहा है! अपनी क्षणिक समस्याओं को लेकर क्या आप उचित कर रहे है?अगर अंतरात्मा से ये आवाज आती है ,नहीहीहीही !! ये उचित नही है ,तो अपनी इस आवाज को कायरता मत समझिये ,अपने आत्मविश्वास पर भरोसा करिए, भगवान पर भरोसा करिए, अपने संस्कारो पर भरोसा करिए, भगवान शिव आपका साथ कभी नही छोड़ने वाले अगर आप सही है तो! क्षण भर के लिए आने वाला आवेश सब कुछ समाप्त कर देता है 1 सुनियोजित छल हमेशा दुखदायी होता है क्यूंकि ये हमेशा विश्वासघात करता है1

दूसरे  के विश्वास को तोडने से बड़ा पाप दुनिया मे कोई नही होता है 1 अगर इस तरह का पाप हमने या आपने किया है तो कृपया कर के भगवान की शरण मे जाए वो ही इस समस्या का समाधान करेंगे1अपनी गलतियों के लिए हमारा क्षमा मांगना कायरता नही है और न ही तो ये कृत्य आपको तुच्छ बनाता है।

 भगवान कृष्ण का “छलिया रूप””विश्व उत्थान” या सकारत्मकता के लिए था आप या हम उनके छलिया रूप को अपने निहित स्वार्थ के लिए, उपयोग मे लाकर भगवान “पीताम्बर” को सामने नही ला सकते या उनके माध्यम से अपने किये गए गलत कार्यो को उचित नही ठहरा सकते 1

आत्मविश्वास और अभिमान मे झीनी सी एक परत होती है ,उस झीनी सी परत को बनाये रखना ही हमारे लिए हमेशा सही होता है नही तो पता नही कब हमारा आत्मविश्वास नकारात्मकता के कारण अभिमान मे परिवर्तित हो जाय 1जहाँ किसी व्यक्ति के मन मे अभिमान आया वहीं  से उसका अदृश्य पतन प्रारंभ ।इसीलिए हमेशा सकारात्मक रहे, खुश  रहे ।

( समस्त चित्र internet के द्वारा ) 

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